Ziyarat E Nahiya In Hindi -
ज़ियारत-ए-नाहिया (Ziyarat al-Nahiya al-Muqaddasa)
ज़ियारत-ए-नाहिया क्या है? (What is Ziyarat-e-Nahiya?)
al-Nahiya al-Muqaddasa (the sacred place) refers to the house of Imam Hasan al-Askari (PBUH) in Samarra. Ziarat e Nahiya Arabic & Urdu - Apps on Google Play
📖 कहानी: "आँखों का लहू और इमाम का दर्द" ziyarat e nahiya in hindi
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इस ज़ियारत में इमाम फ़रमाते हैं कि "अगर ज़माने ने मुझे देर से पैदा किया और मैं कर्बला में आपकी मदद न कर सका, तो मैं सुबह-शाम आप पर आँसू बहाऊँगा और आँसुओं के बजाय खून रोऊँगा।"
"आप अकेले थे, न कोई मददगार था, न कोई मदद करने वाला। आपने अपने पवित्र कंठ से पानी मांगा, लेकिन जालिमों ने आपको शहादत का जाम पिला दिया।" This link or copies made by others cannot be deleted
ज़ियारत में उस दर्दनाक वक़्त का ज़िक्र है जब ख़ैमे (टेंट) जला दिए गए और अहल-ए-बेत (इमाम के परिवार) की ख़वातीन (महिलाएं) नंगे सर मक़्तल की तरफ दौड़ीं।
"सलाम हो उन ईमान वालों पर जिन्होंने तुम्हारा साथ दिया और तुम्हारे लिए कुर्बान हो गए।"
ज़ियारत पढ़ने का तरीका (Steps to Recite) Try again later
ज़ियारत-ए-नाहिया पढ़ने के कई उद्देश्य हैं:
इस ज़ियारत के दो मुख्य संस्करण हैं:
इसे अक्सर रोते हुए या गमगीन आवाज़ में पढ़ा जाता है। मुहर्रम के महीने में और विशेष रूप से आशूरा के दिन इसे पढ़ने का बहुत सवाब (पुण्य) बताया गया है।
(सलाम हो उन पर्दानशीं बीबियों पर जो बेपर्दा की गईं...)